भारत-पाक ड्रोन युद्ध: एक साल बाद सवालों के जवाब

भारत-पाक ड्रोन युद्ध: एक साल बाद सवालों के जवाब मई, 27 2026

एक साल पहले मई का वह हफ्ता जब भारत और पाकिस्तान की सीमा पर तनाव चरम पर था। BBC Hindi के कार्यक्रम 'द लेंस' ने इस वार्षिक पुनरावलोकन में उन सवालों को उठाया है जो अभी भी बेजवाब हैं। 7 से 10 मई 2025 तक चलने वाले इस तीखे संघर्ष को इतिहास ने "दो परमाणु शक्तियों के बीच पहला ड्रोन युद्ध" के रूप में दर्ज किया है।

यह सब शुरू हुआ 22 अप्रैल 2025 को, जब पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में घटी एक घटना ने स्थिति को बिगाड़ दिया। दो हफ्ते की तनावपूर्ण स्थिति के बाद, 7 मई को सक्रिय लड़ाई छिड़ गई। बस तीन दिन। फिर 10 मई को शाम 5 बजे (IST) अचानक युद्धविराम। लेकिन क्या वास्तव में सब शांत हो गया? यहीं से असली कहानी शुरू होती है।

ड्रोन युद्ध: नई तकनीक, पुराना विवाद

इस बार की लड़ाई अलग थी। टैंकों और तोपों के साथ-साथ आकाश में ड्रोन और मिसाइलों की बारिश हुई। हिंदी विकिपीडिया और अन्य स्रोतों के अनुसार, यह दुनिया के इतिहास में पहली बार था जब दो परमाणु-संपन्न देशों ने बड़े पैमाने पर अनस्टॉफ्ड एयरियाल व्हीकल्स (UAVs) का इस्तेमाल किया।

भारतीय दावों के मुताबिक, इस दौरान पाकिस्तान स्थित Jaish-e-Mohammed और Lashkar-e-Taiba जैसे आतंकवादी संगठनों के 100 से अधिक सदस्य मारे गए। इनमें अब्दुल रऊफ अज़हर जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। भारत ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान की 10 एयर डिफेंस सिस्टम्स को निष्क्रिय कर दिया।

लेकिन पाकिस्तान की तरफ से मिलती जानकारी बिल्कुल अलग है। वहां दावा किया गया कि भारतीय वायु सेना के 1 राफेल, 1 मिग-29, 1 एसयू-30 और 1 ड्रोन गिराया गया। पाकिस्तान ने कहा कि उसने 9 लोitering म्यूनिशन (घूमते हुए हथियार) मार गिराए और भारतीय चेकपोस्ट्स को नुकसान पहुंचाया। दोनों तरफ के आंकड़े आपस में टकराते हैं, और सच्चाई अभी भी धुंधली है।

हत्याकांड और नागरिक क्षति: कौन सच कह रहा है?

युद्ध की सबसे कड़वी कीमत हमेशा आम आदमी चुकाता है। भारत ने औपचारिक तौर पर 5 सैनिकों और 16 नागरिकों की मौत की पुष्टि की, जबकि 59 नागरिक घायल हुए। वहीं, पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय हमलों में 36 पाकिस्तानी नागरिक मारे गए और कई मस्जिदें नष्ट हुईं।

विशेष रूप से Neelum-Jhelum Hydroelectric Plant को पहुंचे नुकसान को लेकर पाकिस्तान ने भारी आलोचना की। यह पावर प्लांट पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में नीलम नदी पर बना है। पाकिस्तान का आरोप था कि भारत ने जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। भारत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि हमले केवल सैन्य लक्ष्यों पर किए गए।

ऑपरेशन बुनियाँ अल-मर्सूस और सफेद झंडा

10 मई को युद्धविराम से ठीक पहले, पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन बुनियाँ अल-मर्सूस' शुरू किया। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि इस अभियान में भारतीय रेड लाइन के पार कई सैन्य मुख्यालयों और गोदामों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। पाकिस्तान का कहना था कि भारत ने हार मानते हुए 'सफेद झंडा' फहराया और संधि की मांग की।

हालांकि, भारत ने कभी ऐसा कोई दावा स्वीकार नहीं किया। 11 मई 2025 को टीवी चैनलों पर आए समाचारों में भारतीय वायु सेना ने स्पष्ट किया कि "अभियान अभी भी जारी है", भले ही औपचारिक युद्धविराम घोषित हो चुका था। रक्षा मंत्री ने सेना की सराहना की, लेकिन सवाल यह था कि क्या सचमुच जीत हासिल हुई थी या बस समय निकाला गया?

अमेरिकी दबाव या भारतीय निर्णय?

अमेरिकी दबाव या भारतीय निर्णय?

युद्धविराम के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर हुई कि यह फैसला किसका था। न्यूजक्लिक जैसे मीडिया घरानों ने उठाया सवाल: "क्या युद्धविराम भारत का निर्णय था या अमेरिका का दबाव?" पिछले 17 दिनों में सरकार से कोई सवाल नहीं पूछा जा रहा था, लेकिन अचानक सत्ता में बदलाव दिखा।

विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका, ने दोनों देशों को शांत रहने के लिए दबाव बनाया होगा। हालांकि, किसी भी अमेरिकी अधिकारी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। यह सवाल आज भी राजनीतिक बहसों का केंद्र बना हुआ है।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1947 से 2025 तक

यह संघर्ष अकेले नहीं आया। 1947 के विभाजन के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लगातार तनाव रहा है। 1948, 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्धों ने इस क्षेत्र की भू-राजनीति को आकार दिया। सिंधु नदी समझौता (1960) और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसे मुद्दे भी इस तनाव को बढ़ाते रहे हैं।

टेस्टबुक और दृष्टि आईएएस जैसे शैक्षणिक स्रोतों के अनुसार, 2025 का यह संघर्ष उसी लंबी श्रृंखला का एक नया अध्याय है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने की नीति और भारत की कड़ी प्रतिक्रिया ने इस बार के संघर्ष को और भी खतरनाक बना दिया।

Frequently Asked Questions

2025 के भारत-पाक संघर्ष को 'ड्रोन युद्ध' क्यों कहा जाता है?

इसे इसलिए 'ड्रोन युद्ध' कहा जाता है क्योंकि यह पहला मौका था जब दो परमाणु-संपन्न देशों ने बड़े पैमाने पर अनस्टॉफ्ड एयरियाल व्हीकल्स (ड्रोन) और लोitering म्यूनिशन का उपयोग किया। पारंपरिक तोपखाने के साथ-साथ आकाशीय ड्रोन हमलों ने इस संघर्ष को तकनीकी रूप से अलग बना दिया।

युद्धविराम के पीछे अमेरिका की भूमिका क्या थी?

हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मीडिया विश्लेषण बताते हैं कि अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तनाव कम करने के लिए दोनों देशों पर दबाव बनाया था। न्यूजक्लिक जैसे स्रोतों ने यह सवाल उठाया था कि क्या यह निर्णय भारत का स्वतंत्र था या बाहरी हस्तक्षेप का परिणाम।

भारत और पाकिस्तान के हताहतों के आंकड़ों में अंतर क्यों है?

युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अपनी सैन्य उपलब्धियों को बढ़ावा देने और दुश्मन के नुकसान को कम करने की कोशिश करते हैं। भारत ने 5 सैनिकों और 16 नागरिकों की मौत स्वीकारी, जबकि पाकिस्तान ने 36 नागरिकों की मौत का दावा किया। सत्यापित आंकड़े प्राप्त करना कठिन होता है क्योंकि दोनों ओर से प्रचार मशीनें पूरी तरह सक्रिय रहती हैं।

पहलगाम घटना ने इस संघर्ष को कैसे ट्रिगर किया?

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में घटी घटना (जिसके विवरण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं) ने सीमा पर तनाव को तेज कर दिया। इसके बाद लगभग दो हफ्तों तक सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच झड़पें बढ़ती रहीं, जो अंततः 7 मई को पूर्ण blown-out संघर्ष में बदल गई।

ऑपरेशन बुनियाँ अल-मर्सूस क्या था?

यह पाकिस्तान द्वारा शुरू किया गया एक सैन्य अभियान था, जिसे उसने युद्धविराम से ठीक पहले 'जवाबी कार्रवाई' के रूप में पेश किया। पाकिस्तान का दावा था कि इसमें भारतीय सैन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन भारत ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अभियान अभी भी जारी था।